हेलो दोस्तों, मेरा नाम राजेश है और मेरे सभी दोस्तों को दिल से नमस्ते। दोस्तों मैं मुंबई रहने वाला हु और मैं एक कॉल सेण्टर में काम करता हु। आज मैं अपनी ज़िन्दगी की पहली अन्तर्वासना की कहानी लिखने जा रहा हु। यह कहानी मेरी और मेरी गर्लफ्रेंड, रानी की है। यह बात आज से एक साल पहले की है, जब रानी हमारे कॉलोनी में रहने आयी थी। रानी की उम्र २३ साल है और मेरी २६, रानी इस कॉलोनी में नयी आयी थी रहने के लिए। रानी दिखने में काफी खूबसूरत है, रंग थोड़ा सावला है, लेकिन फिगर तो किसी करीना कपूर से कम नहीं। शुरू में रानी की कोई जान पहचान नहीं थी। लेकिन धीरे धीरे उसने बाकी लड़कियों से दोस्ती करना शुरू कर दिया।

शुरू शुरू में मैं ज़्यादा किसी लड़की पर ध्यान नहीं देता। मैं दिन भर अपने काम से ही काफी परेशान हो जाता हु। एक दिन जब मैं अपनी कार में बैठा तो वो मेरी तरफ देखकर मुस्कुरायी। मैंने कुछ न कहते हुए, निकल गया क्यूंकि मुझे ऑफिस जाने में देरी हो रही है। मेरा रानी के अंदर थोड़ा इंटरेस्ट बढ़ने लग गया, हम दोनों एक दूसरे से हर रोज़ नज़रे मिला ही लेते थे। एक दिन मैंने थोड़ी हिम्मत दिखाई और रानी से कहा ''मुझे तुमसे दोस्ती करनी है, ज़रा नंबर देना अपना''
रानी ने बिना किसी दिक्कत के मुझे नंबर दे दिया। फिर हम दोनों जब भी मिलते थे कुछ वक़्त के लिए बातें ज़रूर करते थे। लेकिन पता नहीं अचानक हमारे कॉलोनी के लोग हम दोनों को बातें करते हुए देख लिया, जिससे शायद रानी के माँ बाप को अच्छा नहीं लगा। रानी ने आकर मुझसे कहा ''हमसे बात मत करना''
इतना कहकर वो भाग गयी। मैंने सोचा बताओ के लड़की मेरी दोस्त नहीं बन सकती। अगले दिन मैं ऑफिस जा रहा था, वो मेरी तरफ देख रही थी, लेकिन मैंने तो सीधा अनदेखा कर दिया। पीछे से फिर उसने मुझे आवाज दी और ऑफिस तक छोड़ने के लिए कहा। उसका ऑफिस मेरे ऑफिस के पास ही था। मैंने उससे ऑफिस छोड़ दिया और बिना कुछ कहे गाडी लेकर अपनी ऑफिस की तरफ ले गया। शायद रानी समज की मैं उससे गुस्सा हु। उसी शाम मैं ऑफिस से घर आते वक़्त फेसबुक चला रहा था। एक मैसेज आया हुआ था, मैंने नाम तो देखा नहीं और फ़ोन को साइड में रख दिया। फिर एक मैसेज के साथ फोटो आया, यह फोटो था रानी का।
रानी ने मुझसे कहा ''कॉल करो, मैं फ्री हु''
हम दोनों में फिरसे बातें होने लग गयी और उसने मुझे ''सॉरी'' भी कहा। अब ऐसे ही करते करते हम रोज़ बातें करते थे। रात को वीडियो कॉल भी करते थे। अब यह दोस्ती धीरे धीरे प्यार में बदलने लग गयी। हम दोनों को बातें करते करते तीन महीने हो चुके थे। दिसंबर का महीना था और हलकी हलकी ठंडी भी पड़ने लग गयी। अब मैंने प्लान बनाया की रानी को ऑफिस के बाद बीच पर ले चलते ह। हम दोनों के ऑफिस ख़तम होने के बाद हमसे खूब सारा खाया,, बातें भी की। धीरे धीरे लोग भी वह से जाने लगे थे। मैंने अपना सर झुककर रानी को प्रॉप्स किया।
रानी बिलकुल शर्मा गयी बस मेरी आँखों में आँखें डालकर देखने लगा और आखिर में हां कर दिया। मैंने तुरंत उसे ज़ोर से गले लगा लिया। रात का वक़्त था और एक दो ही लड़के थे वह अपनी लड़कियों के साथ। मैंने तुरंत रानी को किश करना शुरू कर दिया, रानी भी बिलकुल गरम हो रही थी। मैं समज गया आज रानी की सील टूटने वाली है। मैं रानी को किश करते हुए उससे गर्दन पर चूमने लगा। रानी बिलकुल मदहोश थी।
मैंने कुर्ती के अंदर से हाट डालकर रानी की चूचियों को दबाने लगा, रानी हलकी हलकी सिसकियाँ लेने लग गयी। मैं समज की यह लड़की चुदने के लिए तैयार है।

लेकिन अचानक वह कुछ लोग आ गए और हमने अपने कपडे सही कर दिए। मैंने रानी से कहा ''अब बिना तुम्हारे बदन को चूमे, नींद नहीं आएगी''
रानी ने मुझे किश किया और तुरंत एक कॉल लगाया। कॉल पर उसने अपने पापा से कहा की वो १ बजे तक आएगी, और कल उसकी छूटी है मैं समज की रानी क्या चाहती है। तुरंत मैंने सबसे पास वाले होटल में रूम बुक किया और अब था असली मज़ा, जहा सिर्फ मैं और रानी। हम दोनों ने बड़ी जोश में अपने कपडे उतारे और सीधा बेड पर चले गए। यहाँ तक की हमने लॉक भी नहीं लगाया ढंग से। मैंने तुरंत रानी को अपनी बाहों में भरा और ज़ोर ज़ोर से चूचियों को मसलने लगा। रानी की सिसकियाँ 'उफ्फफ्फ्फ़ अह्ह्ह्ह' उफ्फफ्फ्फ़'' मुझे और गरम कर रही थी। मैंने सीढ़ी रानी की ब्रा उतार फेकि और पैंटी के अंदर से उसकी चुत में ऊँगली डालने लगा। ऐसा मैं कर रहा था की रानी की चूचियों को और चुत को खा जाऊ।
मैं रानी की चुत को ज़ोर ज़ोर से रगड़ने लगा और रानी मेरे लंड को ज़ोर ज़ोर से मसलकर हिला रही थी। उफ्फफ्फ्फ़ यह लड़की इतनी बड़ी चुडासी होगी मैंने कभी नहीं सोचा था। रानी ने मुझे सीधा लेटाया और अपनी गांड मेरे मुँह के ऊपर रख दिया। मैं समज की इसे गांड चटवाने में गज़ब का मज़ा आता है। रानी थोड़ा झुक गयी और मेरे खड़े लंड को अपने दांतों से काट रही थी। मैं भी रानी की गांड को काट रहा था। हम दोनों की काफी गरम हो चुके थे। रानी ने मेरे लंड को चूस चूस के लाल कर दिया लेकिन वो छोड़ नहीं रही थी।
मैंने रानी को बेड पर पटका और मेरा लंड बिलकुल तैयार था रानी के सील तोड़ने के लिए। मैंने रानी की टांगों को अपने कंडे पर उठाया और एक ज़ोर का धक्का दिया, मेरा पूरा लंड अंदर घुस गया। रानी की चुत ढीली हो चुकी थी, क्यूंकि वो एक बार पहले झड़ चुकी थी। जैसे ही मैंने लंड घुसाया, रानी ज़ोर से चिल्लाई ''हाय राम, मैं मर गयी, प्लीज धीरे''
ऐसे रानी ने मुझे १० बार बोलै लेकिन मैं मन्ना नहीं। मैंने उस रात रानी की जमकर ठुकाई की, वो रोने लग गयी लेकिन मैं नहीं माना। यहाँ तक की मैंने उससे अपनी बाहों में उठाकर भी चोदा। जिस स्पीड से मैं लंड को अंदर बहार कर रहा था, ऐसे शायद मैंने आज तक किया हो। रानी सिर्फ १५ मिनट में झड़ चुकी थी। मैं फिर भी नहीं रुका, मैं उससे जमकर चोद रहा था। जब मैं झडा तो पूरा रस मैंने रानी की चुत में गिरा दिया और सीधा बेड से उठ गया। रानी ने फिर अपनी जीब से मेरे लंड को साफ़ किया और खुद बाथरूम में जाकर अपनी चुत को साफ करकर आयी।
पहले मैंने रानी को घर छोड़ा, रात के १ बज चुके थे और फिर आधे घंटे बाद मैं घर गया, ताकि किसीको पता नहीं चला। रानी अब हर दूसरे तीसरे दिन मुझसे चुदती थी और आज भी उसकी चूचियां मेरे लंड को पहली बार में ही खड़ा कर देती है।
sex kahani | antarvasna | hindi sex kahani | hindi sex story | chudai ki kahani | hindi sex stories | sex kahaniya | sexy story| antarvasana antarvasana sex story antarvasna ANTARVASNA HINDI ANTARVASNA HINDI KAHANI antarvasna sex stories Sex Story in Hindi sex story online
Comments
Post a Comment